Sunday, January 15, 2017

मेरिल स्ट्रीप का भाषण / रवीश कुमार


गोल्डेन ग्लोब्स में सेसिल बी डिमेले सम्मान को स्वीकारते हुए प्रसिद्ध अभिनेत्री मेरिल स्ट्रीप का भाषण। इसके बाद इस भाषण की प्रतिक्रिया में लिखा दो लेख पढ़ सकते हैं। अपूर्वानंद ने Satyagrah.scroll.in पर हिन्दी में लिखा है और प्रकाश के रे ने Bargad.org पर मेरिल को अंग्रेज़ी में एक पत्र लिखा है।
आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद. धन्यवाद. कृपया बैठ जाएं. कृपया बैठ जाएं. धन्यवाद. मैं आप सभी को बहुत प्यार करती हैं. आपको मुझे माफ करना होगा. मैंने इस सप्ताहांत चिल्लाने और अफसोस जाहिर करने में अपनी आवाज खो दी है. और इस साल के शुरू में कभी मैंने अपना दिमाग भी खो दिया है. इसलिए मुझे पढ़ कर बोलना होगा. शुक्रिया, हॉलीवुड विदेशी प्रेस. ह्यूग लौरी की बात से शुरू करती हूं. आप और इस कक्ष में मौजूद हम सभी, सचमुच, अभी अमेरिकी समाज के सबसे तिरस्कृत लोग हैं. इस बारे में सोचें. हॉलीवुड, विदेशी, और प्रेस. लेकिन हमलोग हैं कौन? और, आप जानते ही हैं कि हॉलीवुड क्या है. दूसरी जगहों से आये हुए लोगों का एक समूह.
मैं न्यू जर्सी में पली-बढ़ी और वहां के पब्लिक स्कूलों में मेरी रचना हुई. वायोला डेविस साउथ कैरोलाइना में बटाई पर खेती करनेवाले घर में पैदा हुई थीं, और वे लॉन्ग आइलैंड के सेंट्रल फाल्स में बड़ी हुईं. सारा पॉलसन को अकेली मां ने ब्रूकलिन में पाला-पोसा. ओहायो की सारा जेसिका पार्कर सात-आठ संतानों में एक थीं. एमी एडम्स इटली में पैदा हुई थीं. नताली पोर्टमैन जेरूसलम में जन्मी थीं. उनके जन्म प्रमाण पत्र कहां हैं? और सुंदर रुथ नेग्गा इथियोपिया में पैदा हुईं और शायद उनका लालन-पालन आयरलैंड में हुआ. और इस पुरस्कार समारोह में उन्हें वर्जीनिया की एक छोटे शहर की लड़की की भूमिका के लिए नामित किया गया है. सभी भले लोगों की तरह ही रेयान गॉस्लिंग कनाडा से हैं. और देव पटेल केन्या में पैदा हुए, लंदन में पले-बढ़े, और इस समारोह में तस्मानिया में बड़े हुए एक भारतीय की भूमिका निभाने के लिए मौजूद हैं.
हॉलीवुड बाहरी और विदेशी लोगों से भरा पड़ा है. अगर आप उन सभी को बाहर फेंक देंगे, तो आपके पास फुटबॉल और मार्शल आर्ट्स (जिनमें कोई कला नहीं है) के खेल देखने के अलावा कुछ और नहीं बचेगा. उन्होंने यह कहने के लिए मुझे तीन सेकेंड का समय दिया था. अपने से भिन्न लोगों के जीवन में प्रवेश करना और आप तक उसके अनुभव को पहुंचाना ही किसी अभिनेता या अभिनेत्री का एकमात्र काम है. और इस साल के अनेक, ढेर सारे अभिनेताओ-अभिनेत्रियों ने अपने प्रभावपूर्ण और गंभीर काम से यही किया है.
इस साल एक ऐसा अभिनय प्रदर्शन रहा है जिसने मुझे हैरान कर दिया. इसके कांटे मेरे दिल में धंस गये. ऐसा इसलिए नहीं कि यह अच्छा था. उसमें कुछ भी अच्छा नहीं था. लेकिन यह असरदार था और इसने अपना काम किया. इसने अपने लक्षित दर्शकों को हंसाने और अपनी दांत दिखाने का उद्देश्य पूरा किया. यह वह क्षण था जब हमारे देश के सबसे सम्मानित पद पर बैठने के आकांक्षी एक व्यक्ति ने एक विकलांग संवाददाता की नकल की जिससे उस व्यक्ति के धन, संपदा, ताकत और उलटवार करने की क्षमता से कोई तुलना नहीं की जा सकती है. जब मैंने यह देखा, तो मेरा दिल टूट गया. मैं अब भी इसे अपने दिमाग से हटा नहीं पा रही हूं क्योंकि ऐसा किसी फिल्म में नहीं हुआ था. यह वास्तविक जीवन था.
और, किसी सार्वजनिक मंच से, किसी ताकतवर द्वारा किसी को अपमानित करने की यह भावना सभी के जीवन पर असर डालती है क्योंकि इससे दूसरों को भी ऐसा ही करने की एक तरह अनुमति मिल जाती है. अनादर से अनादर पैदा होता है. हिंसा हिंसा को भड़काती है. जब ताकतवर अपनी स्थिति का इस्तेमाल दूसरों को दबाने के लिए करता है, तब हम सभी पराजित होते हैं.
इस बात से मैं प्रेस पर आती हूं. हमें एक सिद्धांतवादी प्रेस की जरूरत होती है जो सत्ता को जवाबदेह बना सके, जो उनकी हर गलती पर अंगुली उठा सके. इसी वजह से हमारे संस्थापकों ने प्रेस और उसकी आजादी को हमारे संविधान में उल्लिखित किया है. इसलिए मैं अपनी पहुंच के लिए प्रसिद्ध हॉलीवुड विदेशी प्रेस और हमारे तबके के सभी से यह निवेदन करती हूं कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए बनी समिति को समर्थन देने के लिए आगे आयें. क्योंकि हमें आगे बढ़ने के लिए उनके साथ की जरूरत है. और, उन्हें सच की सुरक्षा के लिए हमारी जरूरत है.
एक बात और. एक दफा मैं फिल्म सेट पर खड़ी शिकायत कर रही थी कि क्या हम खाने के समय पर भी काम करते रहेंगे या घंटों शूटिंग चलती रहेगी आदि आदि. इस पर टॉमी ली जोंस ने मुझसे कहा, मेरिल, क्या यह बड़ी बात नहीं है कि हम कलाकार हैं. हां, यह बड़ी बात है. और हमें एक-दूसरे को इस हैसियत तथा सहानुभूति के उत्तरदायित्व की याद दिलाते रहना होगा. हम सभी को उन उपलब्धियों पर गर्व होगा जिन्हें आज हॉलीवुड पुरस्कृत कर रहा है.
जैसा कि मेरी प्यारी दोस्त दिवंगत प्रिंसेस लीआ ने एक बार मुझसे कहा था, अपने टूटे हुए दिल को कला में बदल दो. धन्यवाद.

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