Monday, January 2, 2017

पढना-लिखना सीखो ओ मेहनत करने वालो

साल का पहला दिन होने के अलावा 1 जनवरी नुक्कड़ नाटक आंदोलन के प्रतिनिधि चेहरे - सफदर हाशमी - का शहादत दिवस भी है. दिल्ली के पास साहिबाबाद मे नुक्कड़ नाटक-हल्ला बोल- करते हुए कांग्रेसी गुंडों ने उन पर हमला किया और 1 जनवरी 1989 को उनकी शहादत हो गयी. नुक्कड़ नाटक करते हुए शहीद होने से पहले भी उन पर और उनकी नाट्य टीम-जन नाट्य मंच पर कई बार पुलिस और गुंडों ने हमला किया था. आज जब अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता पर नए सिरे से हमले तेज हो रहे हैं तो सफदर हाशमी की शहादत को याद करना समीचीन होगा. सफदर हाशमी से उत्तराखंड का एक संबंध यह भी रहा है कि 1976 मे गढ़वाल विश्वविद्यालय मे अँग्रेजी के प्राध्यापक रहे थे. उस दौर पर डा.प्रभात उप्रेती ने एक बेहतरीन पुस्तक - सफदर : एक आदमक़द इंसान- लिखी है. सफदर को उनके शहादत दिवस पर याद करते हुए उनकी यह बहुचर्चित कविता प्रस्तुत है -

पढ़ना-लिखना सीखो ओ मेहनत करने वालो
पढ़ना-लिखना सीखो ओ भूख से मरने वालो
क ख ग घ को पहचानो
अलिफ़ को पढ़ना सीखो
अ आ इ ई को हथियार
बनाकर लड़ना सीखो
ओ सड़क बनाने वालो, ओ भवन उठाने वालो
खुद अपनी किस्मत का फैसला अगर तुम्हें करना है
ओ बोझा ढोने वालो ओ रेल चलने वालो
अगर देश की बागडोर को कब्ज़े में करना है
क ख ग घ को पहचानो
अलिफ़ को पढ़ना सीखो
अ आ इ ई को हथियार
बनाकर लड़ना सीखो
पूछो, मजदूरी की खातिर लोग भटकते क्यों हैं?
पढ़ो,तुम्हारी सूखी रोटी गिद्ध लपकते क्यों हैं?
पूछो, माँ-बहनों पर यों बदमाश झपटते क्यों हैं?
पढ़ो,तुम्हारी मेहनत का फल सेठ गटकते क्यों हैं?
पढ़ो, लिखा है दीवारों पर मेहनतकश का नारा
पढ़ो, पोस्टर क्या कहता है, वो भी दोस्त तुम्हारा
पढ़ो, अगर अंधे विश्वासों से पाना छुटकारा
पढ़ो, किताबें कहती हैं – सारा संसार तुम्हारा
पढ़ो, कि हर मेहनतकश को उसका हक दिलवाना है
पढ़ो, अगर इस देश को अपने ढंग से चलवाना है
पढ़ना-लिखना सीखो ओ मेहनत करने वालो
पढ़ना-लिखना सीखो ओ भूख से मरने वालो

( कबाड़ख़ाना ब्लॉग से )

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