Wednesday, July 6, 2016

Revenue and Capital Receipts

Revenue Expenditure, Capital Expenditure

अजब लड़की है | अब्बास ताबिश

किसी के ब" अद
अपने हाथो की बदसूरती में खो गयी है वो
मुझे कहती है "ताबिश ! तुमने देखा मेरा हाथो को
बुरे है ना ?
अगर ये खूबसूरत थे तो इनमे कोई बोसा क्यों नहीं ठहरा 
अजब लड़की है
पूरे जिस्म से कटकर फकत हाथो में ज़िंदा है
सुराहीदार गर्दन नरम होठो तेज नजरो से वो बद -जन है
इन अपनों ने ही उसको सर -ए -बाजार फेंका था
कभी आँखों में डूबी
कभी बिस्तर पे सलवट की तरह उभरी
अज़ब लड़की है
खुद को ढूंढती है
अपने हाथो की लकीरो में
जहाँ वो थी ना है ,आइन्दा भी शायद ना होगी
वो जब उंगली घुमा कर
फैज़ की नज़्में सुनाती है
तो उसके हाथ से पूरे बदन का दुःख झलकता है
वो हंसती है तो उसके हाथ रोते है
अज़ब लड़की है
पूरे जिस्म से कटकर फकत हाथो में ज़िंदा है
मुझे कहती है "ताबिश ! तुमने देखा मेरा हाथो को
बुरे है ना ?
मै शायद गिर चूका हूँ अपनी नज़रो से
मै छिपना चाहता हूँ उसके थैले में
जहाँ सिगरेट है माचिस है
जो उसका हाल माजी और मुस्तकबिल !
अज़ब लड़की है
आये तो ख़ुशी की तरह आती है
उसे मुझसे मोहब्बत है
के शायद मुझमे भी बदसूरती है उसके हाथो की
- (अब्बास ताबिश )

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