Saturday, December 10, 2016

बोल! अरी ओ धरती बोल / मजाज़ लखनवी

बोल !अरी ओ धरती बोल

राज सिंहासन डावांडोल !

बादल बिजली रैन अंधियारी

दुख की मारी परजा सारी

बूढे़ बच्चे सब दुखिया हैं

दुखिया नर हैं दुखिया नारी

बस्ती बस्ती लूट मची है

सब बनिए हैं सब व्यापारी

बोल ! ओ धरती बोल

राज सिंहासन डावांडोल !

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