Monday, May 9, 2016

तुम्हारे लिए



मैं चाहता हूँ
तुम उन जगहों तक जाओ जहां तक मैं नहीं जा पाया.
उन पहाड़ों पर
जिनपे मैं चढ़ना चाहता था
और उन खंडहरों में भी
जिनमें मैंने रात बिताने के सपने देखे थे.
जानता हूँ
आसान नहीं है
अपने मन का करना और मन माफ़िक चलना
मैंने भी घुटने टेके हैं.
मैं चाहता हूँ
तुम न टेकना-
भले ही मैं ही क्यों न रोकता रहूं
तुम्हें करने से कुछ.
लेकिन तुम करना-
वो जो तुम चाहते हो.
हर कोई तुम्हें
अपने किसी साँचे में ढाल के
कुछ बनाना चाहता है.
तुम मत बनना.
हर कोई चाहता है
कि उसके कहे सा तुम करो.
तुम मत करना.
किसी की नज़र में बुरा होना बुरी बात नहीं,
अपनी नज़र में खटकना बुरा है.
किसी के पैरों के ज़िंदा निशाँ पे मत चलना.
ख़ुद की राह चलना,
काँटों से मत डरना.
दुनिया अर्ध-सफल लोगों से भरी पड़ी है.
ये लोग बड़े तार्किक हैं
और अपनी सुना सुना के
तुम्हारे समझने-करने की शक्ति क्षीण कर देंगे.
या तो तुम्हें अपने सा बना लेंगे
या अपना सबऑर्डिनेट.
तुम अपनी राह चलना
भले हार जाओ.
ये बेहतर है
अर्ध-सफल लोगों के गीले निशानों पे चलने के.
उस राह तुम अधूरी सफलता से आगे नहीं जा सकते
जो तुम्हें ताउम्र कचोटती रहेगी.
तुम चलना
जहाँ तुम चाहो
तुम जाना
जहाँ मन हो
तुम करना
जो चाहो.
तुम करना
जो किसी ने करने का नहीं सोचा
और न कोई तुम्हारे सिवा कर पाएगा. 

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