Wednesday, May 4, 2016

राजा राममोहन राय


बहते नहीं
चलने लगते हैं पाँव
और शरीर के तमाम अंग
जैसे छूटना चाहते हों
तमाम शिक्षाओं से
जो बचपन से घुट्टी की तरह पिला दी गईं

जैसे देना चाहते हों अच्छा कल
अपनी पुत्री को,
नव ब्याहता को,
तमाम औरतों को.

तुम्हें सती होने से आपत्ति नहीं है
तुम्हें प्रताड़ना से भी नहीं
जौहर होने से भी नहीं
पर्दा से
और पढ़ न पाने से भी नहीं.

मुझे है,
तमाम आपत्तियां
सब और समाज से.

मैं नहीं कहता
एक दिन में बदल दूंगा सबकुछ
लेकिन एक सदी आएगी
ब्रह्म समाज रहे न रहे
मैं मरुँ या जियूं
लेकिन तुम्हारी देह पे
तुम्हारा अधिकार सबसे ज्यादा होगा
और तुम खुद ही चुन पाओगी,
अपने लिए ज़िन्दगी, पति, आजीविका.

दो सौ साल बाद भी
राममोहन राय
जब राष्ट्रीय पुरुस्कार प्राप्त अदाकार-
कंगना रनौत कहती है
'समाज में सेक्सचुअली एक्टिव लड़की रंडी
और काम में कामयाब लड़की सनकी कही जाती है.'
तो लगता है
एक सदी और इंतज़ार करना होगा,
सूरज के धुर पूरव से उगने में. 

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