Friday, April 22, 2016

रेखा और मध्यमवर्ग


फसल की तरह तुम्हारे चेहरे पे
छुर्रियां उग आई हैं.
सींचने जिनके पास खूब पैसा है
उनके चेहरे पे नहीं उगती ऐसी फसल,
छुर्रिओं की फसल उलटी धुरी से उगती है.

पचपन पार रेखा
तुम जितनी पैतीस की लगती है.
ये सबसे बड़ा उदाहरण है मेरे मध्यमवर्गीय होने का.

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