Thursday, February 11, 2016

लिखते लिखते

जब मैं कानून के पास जाता हूँ तो बकरी को कानून चर जाता है
जब वो कानून के पास जाते हैं तो कानून को बकरी चर जाती है.

वो कहते हैं, मुल्क़ में सब बराबर हैं, क्यूंकि दोनों वाक्यों में 'कानून' और 'बकरी' सामान रूप से उपस्थित हैं. आप भी आईएएस की प्रिपरेशन कीजिये जम्हूरियत के कोनों से लिखी किताबें डिप्लोमेट बना देंगी और आप चाशनी लगा के झूठ को ढाँपना सीख जायेंगे.

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तुम्हें किताबों में लिखता अगर तो
सबकी हो जाती तुम
डायरी में लिखा इसलिए,
और वो डायरी खो गई घर बदलते.

खो गई तुम!
किताब बनाना बेहतर था,
फिर तो खरीद पाते.

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एक शेर था,
दूसरा शेर था,
बाकि जंगल  था
'न किसी पे ज़ुल्म, न किसी पे किसी का हक़' वाला.

कुछ दिन एक शेर जंगल पे राज करता
कुछ दिन अगला.
कुछ दिन एक शेर छुपे चुपके जानवर खाता
कुछ दिन अगला.

जंगल का मोटो था-
राजा प्रजा है,
प्रजा राजा है.
न कोई मरेगा, न कोई मारेगा.


लेकिन
न एक शेर दूसरे को जानवर खाने से रोकता
न दूसरा शेर पहले को जानवर खाने से रोकता.

इस तरह राज चलता रहा
जंगल में सौहार्द बना रहा.
प्रजा राजा की रही
राजा प्रजा का रहा.

मरे जानवर
कुछ खुद को दांत गढ़ा मर गए,
कुछ सांप्रदायिक दंगो में मर गए.
घोषित किये जाते रहे.
लोकतंत्र बचा रहा.

डेमोक्रेसी शेरों द्वारा
'मेनिपुलेटिंग पीपल फॉर  आउन बेनिफिट'
के अलावा क्या है?

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