Wednesday, March 18, 2015

शिक्षा पद्धति का वादा है, वह मुझे बेहतर इंसान बना रही है!

उधारी 

जाते-जाते तुमने,
पीले बादल के कवर वाली किताब में
दबा के जो नया पता दिया था-
उसमें रहती हो क्या?
कुछ सौ रूपये सख्त ज़रूरी हैं,
पुराने इश्क़ के खातिर मिलेंगे?
या हमारा रिश्ता
दो कोढ़ी की उधारी लायक
तक भी न बन सका था?

---*---

अप्रैज़ल (Performance Appraisal )

नस्लभेद बहुत है यहां
गोरी गायों के मंत्री बन गए
काली भैंसे किसी ने न पूछी!
मैं न कहता था,
अप्रैज़ल तुम्हें ही मिलेगा जानेमन
दूध मेरा कोई कितना भी दुहे!

---*---

तुम्हारा चेहरा

छत से दिखता है सूरज
साइकल पे एक बूढ़ा
सड़क पे झड़े पत्ते
मोटे इवनिंग वॉकर्स
और बादलों में तुम्हारा चेहरा.

---*---
शिक्षा पद्धति
बचपन में
किसी को मिले मुझसे कम मार्क्स
किसी को मिले मुझसे ज्यादा.
जिन्हें कम मिले
उन्हें मैंने हीनभावना से देखा,
जिन्हें ज्यादा मिले
मैं उनसे जलने लगा.
शिक्षा पद्धति का वादा है,
वह मुझे बेहतर इंसान बना रही है! 

---*---

चाँद 

रात के शीशे में उजाले का रिफ्लेक्शन
हम भी इसके नीचे, तुम भी तकते इसे
हाय! ये चाँद क्या क्या करता है!!
अपोलो-13 को खूबसूरत न लगा होगा,
जितना इधर से लगता है.


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सुखन 

क़ासिद लौट जाते हैं पते पूछते
न गलियां पता न मेरा पता है.
बैरंग खतों में रंग जो उड़ेले थे

बोसों की सुखन लबों को याद है!

जादू से कोख भर देते हैं

ओट में छुप जाओ की चुम्बन लेना यहां वर्जित है
हाँ, हाँ पेशाब कर लो, सड़क आदमी के बाप की है
शुक्र मनाओ आप भारत में हैं.
उफ़! औरतें ये पर्दा भी नहीं करतीं
ये हैं संस्कार आज के
मादर##, बेन## पश्चिमी संस्कृति का असर है!
हटो की लुंगी पहिन लूँ अब
कच्छे में बहुत क़स्बा नाप लिया.
मेरे क़स्बे के यहां से भी
एक हाइवे निकलना चाहिए.
हमारी औरतें तो कम से कम नित्यक्रिया
आराम से कर सकें!
रहने दो, रेल निकलवा दो
पटरियां काम आएंगी.
गौ-हत्यारी है वो कौम,
ये नहीं सहेगा हिन्दू.
अबे हटा सड़क से वो गाय
मार दो-चार लट्ठ,
किसने साली को यहां छोड़ दिया?
अब क्या इतने भी बुरे दिन हैं कि
रात भर बैठ मानस पढ़ेंगे?
कैसी हिंदी लिखी तुलसी ने,
आधी बात समझ नहीं आती.
सुनो, राम मंदिर वहीं बनेगा
रामजन्म भूमि है वो,
ए. सी. में बैठ हमारे संत यही कह रहे हैं.
हमारे पीर/ संत देवता होते हैं... जादू से कोख भर देते हैं.
बलात्कारी तो एक-दो निकले बस.

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