Saturday, June 6, 2015

छत पे कूँदती लड़की

छत पे ऊंघती चाँदनी दिखी क्या
तुम्हारी आँखें चांदी की है
रेगिस्तान में पानी पहचान लेगी.

धूप से कहो, रात के अगले पहर
रेत ठंडी हो जाती है,
प्यासा राँझा इश्क़ पीने तभी आता है.

धूप को बादल खा गए हैं.
छिपकली से डरती लड़की
धूप से बचा लाई
चांदनी ओक में भर.

धूप राँझा का कुछ न बिगाड़ पाई
लड़की बादल हो गई,
धूप ही खा गई.

छत पे कूँदती लड़की
चांदनी चूम बड़ी हो गई.

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