Thursday, June 4, 2015

एक लड़की


आड़ी-टेडी रेखाएं जब
भविष्य ही गलत बताएं
तो हथेलियाँ छोड़ निकल लो
जैसे झेलम की बाढ़ में बहे हों,
और तुम पाकिस्तान पहुँच गए.

एक लड़की
जो स्पेशल का एहसास कराती है,
हर सुबह डांट के जगाती है
उससे मैं हर तीसरे दिन तुम्हारी बात करता हूँ
फिर भी दिल के किसी कोने से
मुझे चूमना चाहती है.

 रात के तीसरे पहर
यकायक से मेरी आँखें देख
लोरियाँ सुना चुप कराने के कोशिश करता चाँद
तुमसा नहीं, माँ सा लगता है.

'घाव रौशनी दिल तक पहुंचाने का रास्ता है',
रूमी ने लिखा था.
मैं कुरेदता रहा दिल तुम्हारा नाम ले,
रौशनी नहीं पहुंची ,
हाँ तुम धीरे धीरे रिसते ज़रूर हो,
एक दिन में ही सारा का सारा क्यों नहीं बह जाते?
बाढ़ का नाम ले
बहे थे जैसे.

मैं उस लड़की को
दिल में बसाना चाहता हूँ
जो मुझे चूमना चाहती है.
हटो, ज़रा जगह खाली करो.

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