Thursday, June 4, 2015

भले ही चार गुनाहगार छूट जाये, लेकिन एक भी ईमानदार सलाखों के पीछे नहीं होगा.

तुम्हारी अदालत, मेरा सामान और वकील का ईमान
दफे दफे सब बिक गए
देश की ज्यूडिशियरी ने अपने उसूलों में
सबसे ऊपर लिखा-
भले ही चार गुनाहगार छूट जाये,
लेकिन एक भी ईमानदार सलाखों के पीछे नहीं होगा.

बुधुआ ने पेट के खातिर दो जुर्म अपने नाम किये,
घर पे उसके दो रोटी पहुंची
और जेल में उसे भर पेट खाना मिलने लगा.

शर्माजी को भाई की हत्या में न्याय मिला,
पूरे पचपन साल बाद.
हत्यारे प्राकृतिक मौत मर चुके थे,
शर्माजी भी चुक चुके थे.

...और अब्दुल जेल में बंद है
सत्ताईस सालों से.
कोई जमानत ले लिए पहले मिला नहीं
बाद में सिस्टम उसे बंद कर भूल गया.

हत्या के मामले में एक नेता,
हिट एंड रन में एक अभिनेता,
एक भ्रष्ट जज को छोड़ते
देश की ज्यूडिशियरी ने अपने उसूलों में
सबसे ऊपर लिखा-
'भले ही चार गुनाहगार छूट जाये,
लेकिन एक भी ईमानदार सलाखों के पीछे नहीं होगा.'

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