Monday, May 18, 2015

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मैं शहर हो जाऊंगा, तुम मेट्रो हो जाना. मेरे दिल के एक कोने से दूसरे कोने तक अपनी ख्वाहिशें पहुंचाना और कहीं किसी जंक्शन पे मिले ख्वाहिशें हरी-पीली-लाल सी और मेरा दिल मचल जाये तो क़ुतुब सा आकाश चूम एक #घर बसा लेंगे हम. जिसके एक से दुसरे कोने तक पहुँचने मेट्रो की ज़रूरत न पड़ेगी.

छोटा सा घर, बड़े से #अरमान लिए.

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