Tuesday, May 12, 2015

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मैं सिगार हूँ, धीरे-धीरे जल रहा हूँ... तुम धुंआ हो, तेज़ी से उठ रहे हो ऊपर, जा रहे हो दूर... और जो ऐश ट्रे में बचा है वो क्या है? वो रिश्ता है मेरा, तुम्हारा... जो अब बस ‪#‎ख़ाक‬ से सिवा और कुछ नहीं. 

मैं बस उस चिंगारी को खोजता हूँ जिसने मुझे जला दिया, तुम्हें धुंआ किया और रिश्ते को राख. 
वो ‪#‎चिंगारी‬ मैं था या शायद तुम... कभी-कभी हम खुद ही इनफ़ होते हैं बर्बाद होने... किसी तीसरे की ज़रूरत नहीं पड़ती.

चलो अब ये रिश्ते की राख रख लो... अपना दिल मांज लेना.

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