Tuesday, May 5, 2015

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तुम इश्क़ की किताब का पहला पन्ना नहीं थी लेकिन जो भी थीं अधूरा थी. तुम्हें लिखते-लिखते याद आया कि शायद इस पन्ने की भी आखिरी लाइन कहीं अधूरी रह गई तो...? और मैंने लिखना छोड़ दिया... पन्ना आज भी अधूरा है... शायद मेरे से आस छोड़ चुका है और तुम्हारी राह देख रहा है... तुम कुछ लिखोगे...? 


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