Wednesday, March 11, 2015

बापू हमें क्षमा करना

वैसे तो तुम्हारे बारे में करनी चाहिए
ढेर सारी बातें
ढेर सारे अच्छे कर्मों का जिक्र
औरत, अछूत और कोड़ियों के लिए किये तुम्हारे काम,
विशाल नेतृत्व शक्ति
सहृश्णता, प्रेम और अखंडता की कोशिशें
और आज़ादी.
लेकिन हम करते है बातें-
जिनमें कहीं तुम 'सेक्स-एडिक्ट' होते हो,
ब्रह्मचर्य के एक्सपेरिमेंट करते हो
या अग्रेजों के एजेंट दिखते हो.
क्यूंकि हम जो हैं वैसे ही दूसरे को देखते हैं,
अपनी नज़र से अपने जैसा खोजते हैं
और हमारी निम्न बुद्धि निम्नता तक ही जाती है.
हम जो हैं वैसा ही तुम्हें बनाना चाहते हैं.
लेकिन ये अबोधता नहीं है.
लाख कोशिशों बाद इस जन्म तो आपकी परछाई तक न बन पाएंगे.
इसलिए ये हमारी कुंठा है, कुड़न है.
फिर भी,
बापू हमें क्षमा करना.

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