Friday, November 21, 2014

आपने इसे पढ़ा है तो ज़िन्दगी के चार मिनट बर्बाद किये हैं....


पहली बात तो ये कि
ये कोई कविता नहीं है.
दूसरी बात ये कि आप पढ़ रहे हैं
तो अंग्रेजीदां लोगों की नज़र में बेवकूफ रहे हैं.
तीसरी बात ये कि
ये कोई मेरी बेटी नहीं है
जिसकी मैं परवरिश कर रहा हूँ डर-डर के
कि कहीं सड़क पे कोई छेड़ न दे
और न कोई स्कूल टीचर बलात्कार कर दे!
ब्याह दूँ तो जला न दी जाये.
न मेरे लिए बेटा है कविता
जिससे बड़े होने का इंतज़ार करूँ
जो इतना कमाए कि धन की खदान बन जाए
या इतना यश दे कि नाम हो जाए.
(हक़ीक़त में मैंने अपनी दम पे कभी नाम नहीं पाया,
मैं खुद हारा हुआ इंसान हूँ.)
छठी और अंतिम बात ये
कि कविता एक बकवास से ज्यादा कुछ नहीं,
न ये सरकारों को छठी का दूध याद दिल सकती है
न तुममें संस्कार भर सकती है.
ये न कोई सेक्स-कथा है कि उत्तेजना भर दे
न कोई रोमांस कथा कि इश्क़-इश्क़ कर उठें आप.
तो कविता क्या है?
भाड़ में जाये ये प्रश्न.
मगर आपने इसे पढ़ा है
तो ज़िन्दगी के चार मिनट बर्बाद किये हैं....
विज्ञान कहता है जो लौट के कभी नहीं आएंगे. 

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