Friday, March 21, 2014

कश्तियाँ डोलती हैं




कश्तियाँ डोलती हैं,
सुबह - शाम.
ज्वार-भाटे तेरे शहर भी
कश्तियाँ हिलाते होंगे.

यादों के भाटे,
ख्वाबों के ज्वार,
मन की कश्तियाँ.

कश्तियाँ डोलती  हैं.

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