Wednesday, December 4, 2013

स्ट्रोंग कॉफी



तुम्हें भुलाने हर दिन
बस एक 'स्ट्रोंग कॉफी' काफी होगी...

ऐसा सोचता था मैं.

तुम गये,
कॉफ़ी हर शाम पीता हूँ
...और पीते-पीते तुम्हें याद करता हूँ.


तुम ठोकर हो, पर शबनमी हो.
दिल को लगती हो, दिल गीला करती हो.
हर दिन... हर दिन.
हर शाम... हर कॉफ़ी पे. 


1 comment:

Gaurav said...

क्या बात है.....!

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