Wednesday, November 6, 2013

पत्थरों पे छैनी से लिखे कुछ दिन.…




1. तुम्हें देखता हूँ तो लगता है गर इंसान कि ज़िन्दगी में सिर्फ बचपन ही होता तो दुनिया ज्यादा खूबसूरत होती. कहते हैं, बचपना जितना बच रहता है, आदमी में उतनी ही आदमियत बचती है. तुममें बहुत इंसानियत है 'बेटू'.


2. तुम एक दिन मुझसे मिलना और कहना 'गलती मेरी नहीं थी' और मैं झुठलाउंगा तर्कों से. लेकिन सच तो ये है तमाम तर्कों के बाद भी मैं तुम्हें नहीं झुठला सकता. कुछ सच झूठ के परदे में ज्यादा खूबसूरत लगते हैं.


3. सबसे बड़ा सुकून अपनी जड़ों तक लौटना है और मिट्टी की गंध महसूस कर पाना है. मैं कभी कभी महसूस कर पाता हूँ कि पापा को अपने गांव में ही सबसे ज्यादा सुकूं क्यूँ मिलता है.


4. 'अब मेरा उद्देश्य सिर्फ शादी करना है...क्यूंकि माँ-बाप ऐसा चाहते हैं.' मैं पूछना चाहता था कि फिर माँ-बाप ने तुम्हें पढ़ाया-लिखाया किसलिए था. लेकिन रुक जाता हूँ. शायद हमेशा खून के रिश्तों का ज़िन्दगी पे ज्यादा हक़ होता है.


5. 'मुझे उससे इश्क़ था... हम 'लेक' साथ गये थे.... जाने से पहले पूरे छह: घंटे तो मेरे साथ थी.' वो पीते-पीते कहता है,  फिर कुछ देर बाद बीच सड़क पे रात बारह बजे हंगामा खड़ा करता है.  मैं उसे थप्पड़ मारते घर ले आता हूँ.
  ये हंगामा किसलिए? जिसने कभी तुम्हें नहीं चाहा उसके लिए?
 मेरी तमाम सोच शून्य है. क्या तुम बताओगी मुझे, ये जाने वाली लड़की?


6. वो शाम गुस्से में घर आता है...बीवी पे दो हुक्म चला तीन थप्पड़ जमाता है. शायद बाहर से खंडित व्यक्तित्व ले के आये इंसान का व्यक्तित्व घर  में औरतें हुक्म मान सदियों से बनाती आ रही हैं.


7. 'यू आर अ गुड टीम प्लेयर, तुम सबसे मिक्स हो जाते हो....लेकिन मुझे लगता है तुम्हें अब भी टेक्निकली हार्डवर्क की ज़रूरत है. टूल समझने की ज़रूरत है.' उसका बॉस उससे कहता है.
'मुझे इंसान दिखते हैं, सिर्फ मशीनें या टूल्स नहीं.' वो केबिन से बाहर रेसिग्नेशन लैटर फेंक निकल आता है.
मैंने उससे ज्यादा हौसले वाला इंसान तब तक नहीं देखा....सुना है वर्धा के एक स्कूल में इंसान बना रहा है.


8.  सुना है एक रात इंसान जब हद से गुजर जायेंगे, वानर राज करेंगे धरती पर.


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