Tuesday, June 11, 2013

अमर कविता !



सड़क पे रोटी टटोलता आदमी देख
मैंने लिख दी एक कविता.

दो दिन बाद,
खाली अंतड़ियाँ लिए
वो आदमी मर गया.

.....और मेरी कविता अमर हो गयी!

काश! मैंने
दो शब्द कहने की बजाय
दो निवाले दिए होते.


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