Wednesday, February 6, 2013

I Love You!


               
     
                    देखो, 'अहा! ज़िन्दगी' एक शब्द लिखने की एक अठन्नी देती है......तुमसे तो खामखाँ 'आई लव यू' बोल दिया....लिखता तो कम से कम डेढ़ रुपये तो कमाता.....अब देखो कल तक खुश था जिसके लिए, वो भी गम बन के आ गया सामने. वक़्त के साथ कब सही गलत, और कब गलत सही हो जाये, पता ही नहीं चलता!
                     अब ये मत कहना, तुम्हें समझ नहीं आया....ये साहित्यिक नहीं है. सीधे सीधे कहा है....बस.


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