Saturday, July 28, 2012

Zindagi: A Song



लिहाजों
लिवासों
लफासों
सवालों से
भरी ये ज़िन्दगी...

थमी सी
रुकी सी
चली सी
उड़ी सी
बढ़ी ये ज़िन्दगी...

तुममें भी
हममें भी
खुशियों में
गम में भी
थोड़े उजाले में
तम में भी
दौड़ी चली ये ज़िन्दगी...

ये ज़िन्दगी...
ये ज़िन्दगी.......

इकरारों में
इन्कारों में
इशरारों में
इशारों में
कुछ कहती
कुछ सुनती
ख्वाब नये बुनती
चल पड़ी ज़िन्दगी....

ये ज़िन्दगी...
ये ज़िन्दगी.......

बेनामी में
सुनामी में
सूखे में
अकाली में
दो दानों में
खाली थाली  में
डगमगायी, सम्हली ज़िन्दगी....

ये ज़िन्दगी....
ये ज़िन्दगी.........
ज़िन्दगी, ज़िन्दगी, ज़िन्दगी.......

खुशनसीब ज़िन्दगी,
हर दिल अज़ीज़ ज़िन्दगी...
ये ज़िन्दगी...
ज़िन्दगी, ज़िन्दगी............ज़िन्दगी.

7 comments:

Vivek VK Jain said...

जब भी Instrument ले बैठता हूँ...कुछ ना कुछ निकलता है, धुन नहीं तो गाने ही....

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूबसूरत है ये ज़िंदगी

ranjana said...

bahut pyari lagi ye gungunati si zindgi...:)
or agar mujhese poocho kya hai zindgi to mai ye kahungi ki....
"zindgi tu hath thaame yun hi chalna tabtalak...
jabtalak poore na ho jayen mere apno ke kwaab"

Saumya said...

good one :)

Vivek VK Jain said...

Thanks :)
Wow!!
"zindgi tu hath thaame yun hi chalna tabtalak...
jabtalak poore na ho jayen mere apno ke kwaab"

Vivek VK Jain said...

Thank you :)

Vivek VK Jain said...

thanks a lot :) :D

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