Tuesday, July 24, 2012

सिगरेट





कुछ टुकड़े रह गये हैं और कुछ कशों की याद
बाकी जो खर्चा था सब ट्रे में पड़ी राख है!

जिंदगी साल्ली सिगरेट सी जली है!

2 comments:

Vivek VK Jain said...

Thank you Anant, your lines are inspiration for this triveni.

दीपक बाबा said...

@जिंदगी साल्ली सिगरेट सी जली है!


श्याद सिगरेट से ज्यादा बेदर्दी से जाली है.

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