Saturday, April 9, 2011

....before packing the bags: inside campus

                              मैं उसे कस के पकड़ता, उसके शरीर पर खड़े हो रहे रोंगटे साफ़ देख सकता हूँ....वो बिलकुल पास है, इतने पास की कभी उसने खुद भी नहीं सोचा होगा की वो मेरे इतने करीब होगी....मैं उसके चेहरे को और भी खूबसूरत बना रहे  बालों को अलग करता हूँ.......उसका चेहरा मेरे बिलकुल पास है, उसकी गर्म साँसे मैं महसूस कर सकता हूँ.....और फिर............'हे  भगवन! हम पूरे पांच मिनट तक  'kiss' करते रहे!!!! इतना लम्बा kiss तो इमरान-दिया मिर्ज़ा ने  'तुमसा नहीं देखा' में भी नहीं किया होगा'

                   'तुम 'idiot' हो' वो mirror में अपनी lipistic' सम्हालते हुए बोलती है.
                   'हाँ, its ur first kiss na? मेरा भी, and i am so happy.' मैं अपना चेहरा धुलते हुए बोलता हूँ.
                  'हाँ लडको के लिए तो ये proudest moments होते है, तुम तो खुश होगे ही.' वो मेरे कंधे पर                                            मारती है. मैं उसके सिर पे हाथ घुमा देता हूँ......उसके बाल बिखर गये हैं, और वो और भी प्यारी लगने लगी है.

पहले मैं toilet से बाहर निकलता हूँ, और गेट के साइड में खड़ा हो गया हूँ, जिससे उसे कोई  boys toilet से निकलते हुए देख ना ले. वो धीरे से निकलती है, बालकनी में कोई नहीं है, सब lectures करने व्यस्त हैं.....वो तेजी से क्लास की और जाती है.
              
                'May I come in Sir?'
              
                'No'  28 साल का 'Control System' पढ़ाने बाला आदित्य उसे ऊपर से नीचे तक Scan करके बोला. (ये Young Faculties की प्रॉब्लम क्या होती है यार? ये अपनी स्टुडेंट्स तक को नहीं छोड़ते.)

              'You are 20 minutes late.' 5 फुट 4 इंच का आदित्य, अपने पीले पेंट से चाक भरे हाथ पोंछते हुए बोला. एक तो इतनी कम Height, फिर ऊपर से मोटा सा चश्मा, उस पर भी ज्यादातर वो डार्क शर्ट पर लाइट पेंट्स पहनता है, राजपाल यादव का पूरा भाई लगता है वो.....लेकिन अपनी स्टुडेंट्स तक पर लाइन मारता है.......मेरी उससे कभी नहीं बनी.
        
            'सॉरी सर, मैं ATM तक पैसे निकालने गयी थी.'


            'आ जाओ.' 'और तुम कहाँ गये थे हीरो?' नीरजा के पीछे मुझे खड़ा देख बोलता है.


            'सर उसको पैसे निकलवाने' पूरी क्लास हंस पड़ती है.


उसका चेहरा देखने लायक है, 'तुम मेरी क्लास कभी Attend मत करना, बाहर जाओ.'


मैं चुपचाप Gate से निकल आया, मन ही मन उसे दो-चार भद्दी गलियाँ देता हूँ.


एक...दो.तीन...पूरी 63 सीढियां उतरने के बाद मैं कंप्यूटर सेंटर पहुँचता हूँ.....यहाँ पूरे dell के computers हैं, इनका के बोर्ड चलाने में मुझे मज़ा आता है, lappy का की-बोर्ड use करना कितना tough होता है ना!


        .मैं सीधा जाकर एक कंप्यूटर पर बैठ गया.....प्रोक्सी साईट से अपना फेसबुक अकाउंट खोलता हूँ....(हाँ, हर एक कॉलेज की तरह यहाँ भी chatting sited बंद क़र के रखी गयी हैं.) ....टोटल 23 notifications ......maximum about comments on my photo ........ 


                 'क्या कर रहे हो यार? मुझे नौकरी से निकलवाओगे क्या?'


मैंने पीछे देखा, पवन था. 'क्या यार पवन, यहाँ फेसबुक तक नहीं खोल सकते.......ये कॉलेज है या आफत?'


पवन lab assistant है, 19 साल का लड़का, BCA final year में है , और data networks and communication  में मास्टर है....part time मेरे कॉलेज में 6000 रूपये महीने पर जॉब करता है....ये जब जॉब के लिए आया था तो lab in-charge रावत के सामने मैंने इसका support किया था, तब से मेरा अच्छा दोस्त है. उसके पास पैसे की तंगी रहती ही, पापा नहीं है...शहर से काफी बाहर रहता है....लेकिन बहुत स्वाभिमानी है, और मेरा बहुत अच्छा दोस्त भी.


            'क्या यार विवेक, तुम भी, वो रावत मुझे डांटेगा अभी.'


            'एक तो वैसे ही मूड ऑफ है ऊपर से तुम भी......'
        
           'फिर नीरजा से लड़ाई?'
          
            'नहीं यार she is a good girl ..... साल्ले मेरी एक faculty ने नाटक किया.....'
          
             'चलो छोडो यार, कोई ब्लॉग पढो, तुम्हे अच्छा लगेगा....वैसे, आज में दोस्तों को पार्टी दे रहा हूँ, आओगे?'


             'कहाँ?'


            'वृन्दावन ढाबा, 8.30 बजे'


            'किस ख़ुशी में?'
          
            'वहीं बताऊंगा'


           'ठीक है, फिक्स 8.30 पर वहीं मिलता हूँ.'


 '......सुरीली अंखियों बाली, सुना है......' मेरा फ़ोन बजता है, ....oh! god ये भी silent पर नहीं था......
मैं कंप्यूटर रूम से बाहर निकल कर बात करता हूँ.


              'चलो आदित्य की क्लास ख़त्म, मैं gate पर हूँ, तुम्हारा wait कर रही हूँ.....घर चलते हैं.' आदतन नीरजा बिना मेरा जवाब जाने ही फ़ोन काट देती है.


                                               *******


                'ये मेरी स्कूटी है और मैं चलाऊँगी, पीछे बैठो.' वो मुझे अपना बैग पकडाते हुए बोलती है.


                'हाँ, तू और तेरी सड़ी सी पिंकी.'
            
                 'just shut up '


पिंकी उसकी पिंक कलर की स्कूटी का नाम है......लडकियां कितनी अजीब होती हैं, अपने taddy , lappy से लेकर स्कूटी तक का नाम रख लेती हैं.


               'कल coaching में मिलते हैं, टेक केयर....'
              
               'you too, और हाँ, मेरे लम्बू-पंडित का भी ख्याल रखना.'
            
               'shut up, he is my papa. he is a nice guy .'
            
               ' i know ........bye '


               'byeeeeeeeeeeeeeeeee '


नीरजा चतुर्वेदी के 6 .3" लम्बे पापा Mr. R . V . चतुर्वेदी को मैं पसंद नहीं हूँ......शायद मैं थोडा rude हूँ, या शायद उनके बाद नीरजा के सबसे करीब....या शायद he is over -protective to her daughter.......जो भी है but overall he is a nice guy .

4 comments:

Apanatva said...

bachapana jhalak raha hai........

आशुतोष said...

sansmaran sundar hai...likhne wal ki tarah..

ZEAL said...

Interesting narration.

दर्शन कौर धनोए said...

कालेज केम्पस के कुछ अनछुए पल --रोमांटिक यादे ! याद आ गई -- वेरी NICE POST ..

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...