Friday, November 20, 2009

तुम

बंजर सी धरती पे,
इक बूँद सा गिरे!
समा गए.
फिर बादल सा छलछला गये.
अब बंजर धरती हरियाली है.
फूल खिले और खुशहाली है.

चट्टान से कठोर मन में,
तुम पानी सा,
दरारों में भरे!!
फिर हिम बन गये,
चट्टानें फोड़ गये!!

अरमानो में,
किरदार सा आ गये!
चुपके से ही समां गये.
अब अरमान जब भी जागते है,
तुमको साथ पाते है!

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